Parvati Song Lyrics (जब जिद पे आ गई पार्वती)
Parvati Song Ka (Introduction)
"जब जिद पे आ गई पार्वती" (Parvati) एक बहुत ही सुंदर शिव-पार्वती लोक-भजन है। ये भजन हनुमान अंस फिल्म का है इस (Parvati Song) में माता पार्वती के कठोर तप और भगवान शिव को पति रूप में पाने की दृढ निष्ठा का वर्णन किया गया है। जब सप्तऋषि माता पार्वती को समझाने आते हैं कि भगवान शिव का रहन-सहन और भेष एक अवधूत जैसा है, तब भी माता पार्वती अपने निश्चय से पीछे नहीं हटतीं। यह भजन भोलेनाथ की सादगी और माता पार्वती की अचल भक्ति का प्रतीक है।
Jab Zid Pe Aa Gayi Parvati Lyrics
शंभू शिव शंभू - भोलेनाथ
जब जिद पे आ गई पार्वती, पार्वती पार्वती,समझाने पहुँचे सप्तऋषि, सप्तऋषि, सप्तऋषि,
काए जिद कर रईं, काए खो मर रईं,
काए जिद कर रईं, काए खो मर रईं, ऐसे वर के लाने,
काए जिद कर रईं, काए खो मर रईं, ऐसे वर के लाने,
जा के शीश पे गंगा, और गले में डारे फिर रए साँप,
जा के शीश पे गंगा, और गले में डारे फिर रए साँप,
इतने सीधे साधे है, सब कहते भोलेनाथ, भोलेनाथ,
जा के शीश पे गंगा, और गले में डारे फिर रए साँप,
इतने सीधे साधे है, सब कहते भोलेनाथ, भोलेनाथ,
ना खपरा ना छपरा, ना फूंस की धरे मड़ैया,
का खावे खों धरो वहाँ, बस रोवत रहत लड़ाइयाँ,
ना खपरा ना छपरा, ना फूंस की धरे मड़ैया,
का खावे खों धरो वहाँ, बस रोवत रहत लड़ाइयाँ,
भेष धरें अवधूत फिरे, अब तुमसे का कै बिन्नू
डोढा डांगड़ ले घूमें वे बिन के कछु अई नईया, कै बिन के कछु अई नईया,
काए जिद कर रईं, काए तप कर रईं,
काए जिद कर रईं, काए खो मर रईं, ऐसे वर के लाने, हाँ ऐसे वर के लाने,
जा के शीश पे गंगा, और गले में डारे फिर रए साँप,
जा के शीश पे गंगा, और गले में डारे फिर रए साँप,
इतने सीधे साधे है, सब कहते भोलेनाथ, भोलेनाथ,
जा के शीश पे गंगा, और गले में डारे फिर रए साँप,
इतने सीधे साधे है, सब कहते भोलेनाथ, भोलेनाथ,
जटा लटा ना कभहूँ सँभार है तिसत महा भयंकर,
मूड पे अधो चंदा और बेला पे घूमें शंकर,
जटा लटा ना कभहूँ सँभार है तिसत महा भयंकर,
मूड पे अधो चंदा और बेला पे घूमें शंकर,
राम नाम के राशिया है वें और उन्हें का चाहने,
काम देव के मर्दनहारी, घर ग्रस्ति का जाने, वे घर ग्रस्ति का जाने,
काए जिद कर रईं, काए खो मर रईं,
काए जिद कर रईं, काए तप कर रईं, ऐसे वर के लाने, बिन्नू ऐसे वर के लाने,
जा के शीश पे गंगा, और गले में डारे फिर रए साँप,
जा के शीश पे गंगा, और गले में डारे फिर रए साँप,
इतने सीधे साधे है, सब कहते भोलेनाथ, भोलेनाथ,
जा के शीश पे गंगा, और गले में डारे फिर रए साँप,
इतने सीधे साधे है, सब कहते भोलेनाथ, भोलेनाथ,
Parvati Song Ka Bhavarth (Meaning in Hindi)
- जब सप्तऋषि समझने पहुँचें: सप्तऋषि माता पार्वती से कहते हैं कि भगवान शिव का कोई निश्चित घर-बार नहीं है, उनके गले में सर्प हैं और वे अवधूत रूप में रहते हैं, इसलिए वे उनसे विवाह का हठ छोड़ दें।
- भोले बाबा की सादगी: भजन में शिव जी की असीम सादगी को दर्शाया गया है कि वे किसी भौतिक सुख-सुविधा या घर-गृहस्थी के बंधनों से परे, केवल राम नाम के प्रेमी और सीधे-साधे भोलेनाथ हैं।
- पार्वती माता की भक्ति: ऋषियों की बातों के बावजूद माता पार्वती का भक्ति-भाव और संकल्प अटूट रहता है और वे भोलेनाथ को ही अपना सर्वस्व मानती हैं।
Jab Zid Pe Aa Gayi Parvati Details and Credits
| विवरण (Details) | जानकारी (Information) |
|---|---|
| Song Title | Parvati (पार्वती) |
| Singer | Sadhu S. Tiwari (साधु एस. तिवारी) |
| Lyricist | Sadhu S. Tiwari (साधु एस. तिवारी) |
| Music Director | Sadhu S. Tiwari (साधु एस. तिवारी) |
| Category | Devi Geet / Shiv Parvati Bhajan / Devotional (देवी गीत / शिव-पार्वती भजन / भक्ति गीत) |
| Language | Hindi (हिंदी) |